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Vivekananda Kendra Hindi Prakashan Vibhag

विवेकानंद कन्या भगिनी निवेदिता

Rs.85.00
विवेकानंद कन्या भगिनी निवेदिता
विवेकानंद कन्या भगिनी निवेदिता
Translator: 
Sangita Soman
VRM Code: 
3196
Publication Year: 
2017
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
212
विवेकानंद कन्या भगिनी निवेदिता
विवेकानंद कन्या भगिनी निवेदिता

भगिनी निवेदिता मार्गरेट नोबल वंश से गौरी तथा जन्म से ही आयरिश थी।

स्वामी विवेकानंद की संपर्क में आने के बाद 30 वर्ष की अपनी कृपा यू मे उनका शिष्य वह ग्रहण कर भारतवर्ष पधारी। स्वामी जी ने उन्हें निवेदिता नाम दिया उसका अर्थ जीवन समर्पित निवेदित किया ऐसा है अभी देने अपने में आमूलचूल परिवर्तन कर हिंदू संस्कृति को पूर्ण मनोयोग से अपनाया तथा सन्यास व्रत की दीक्षा ली।

प्लेग के प्रादुर्भाव के समय कोलकाता के रास्ते झाड़ू से बुहारकर साफ़ किए तथा रुग्ण सेवा भी की। एक कन्या पाठशाला स्थापित कर महिला शिक्षा का भी कार्य किया। ब्रिटिश राज में क्रांतिकारियों का मार्गदर्शन कर उन्हें प्रोत्साहित किया।

प्राणायाम

Rs.30.00
प्राणायाम
Publication Year: 
2017
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
42
Volumes: 
1
Language: 
Hindi

प्राणायाम: मन अनुशासन का श्वसन विज्ञान



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क्रीड़ा योग

Rs.50.00
क्रीड़ा योग
Translator: 
Sandhya Kumari
Publication Year: 
2016
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
126

श्री (स्वर्गीय) दत्ताराम पोळ जो कि विवेकानन्द केन्द्र के वानप्रस्थी कार्यकर्ता रह चुके हैं, अन्य संगठनात्मक गुणों के साथ विभिन्न खेल सीखने के माध्यम से शिविरार्थियों में उनकीछाप विशेष रूप से थी ।
वे वृद्धावस्था में भी युवा का जोश रखते थे और युवाओं में विशेषरूप से प्रचलित थे । यह पुस्तक 'क्रीड़ा योग' उन्हीं की देन है - जिन खेलों से न केवल शरीर ही चुस्त होगा बल्कि मन भी आनन्दित होगा ।
1 : सामूहिक क्रीड़ा
2 : मण्डल क्रीड़ा
3 : एक पंक्ति क्रीड़ा
4 : दो पंक्ति क्रीड़ा
5 : गृहस्थित क्रीड़ा







दिनचर्या

Rs.25.00
दिनचर्या
Translator: 
Sandhya Kumari
VRM Code: 
1539
Publication Year: 
2015
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
64
Volumes: 
1
Language: 
Hindi
दिनचर्या

दिनचर्या : सफल ही नहीं सार्थक जीवन के लिए।



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प्रेरक परिचय

Rs.35.00
Preak Parichay(प्रेरक परिचय)
Translator: 
Nivedita Raghunath Bhide
VRM Code: 
1709
Publication Year: 
2007
Edition: 
3
Format: 
Soft Cover
Pages: 
56
Language: 
Hindi
Preak Parichay(प्रेरक परिचय)

यह काम तुम्हें शोभा नहीं देता - बषपन से ही यह वाक्य हमें अनुशासित करता आया है। माँ ने हमें इसी तरह अपने लिए योग्य कर्म करने की शिक्षा दी और अयोग्य कर्म करने से परावृत किया। भगवान् श्री कृष्ण ने भी रण से पलायन करने के इच्छुक अर्जुन को इन्हीं शब्दों से लताड़ा था। हमारा कर्म ही हमारा परिचय बनता है। कर्म में कुशलता को प्राप्त करने के लिए ही हम सदैव प्रयत्न करते रहते हैं।

विवेकानन्द के एकनाथ

Rs.35.00
विवेकानन्द के एकनाथ
Publication Year: 
2015
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
104
Volumes: 
1
Language: 
Hindi
विवेकानन्द के एकनाथ

स्वामीजी का एक स्वप्न था कि पवित्रता का तेज, ईश्वर के प्रति श्रध्धा तथा मृगेन्द्र के सामर्थ्य से युक्त, दीन-दलितों के प्रति अपार करुणा लिए हुए सहस्त्र युवक-युवती हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक सर्वत्र संचार करते हुए मुक्ति, सेवा अौर सामाजिक उत्थान तथा सभी प्रकार के समानता का आह्वान करेंगे तभी यह देश पौरुष से युक्त होकर जगमगा उठेगा।

कहानियाँ एकनाथजी की

Rs.25.00
कहानियाँ एकनाथजी की
VRM Code: 
3009
Publication Year: 
2014
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
72
Volumes: 
1

स्वामी विवेकानन्द का दृष्टिकोण और भारतीय स्त्री जीवन-भावी पथ

Rs.45.00
स्वामी विवेकानन्द का दृष्टिकोण और भारतीय स्त्री जीवन-भावी पथ
Translator: 
Sumant Vidwans
VRM Code: 
3094
Publication Year: 
2014
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
116
Volumes: 
1
स्वामी विवेकानन्द का दृष्टिकोण और भारतीय स्त्री जीवन-भावी पथ

अात्म - नियन्त्रण सभी के लिए आवश्यक है, किन्तु स्त्रियों के लिए इसकी और अधिक आवश्यक है क्योंकि शक्ति जितनी होती है, उसे सही मार्ग पर रखना भी उतना ही अधिक महत्वपूर्ण और आवश्यकता होता है। उदाहरण के लिए, परमाणु शक्ति अधिक शक्तिशाली होती है और इसलिए इसकी सुरक्षा व उपयोग के लिए अनेक सुरक्षा उपाय करना आवश्यक होता है। शक्ति के भी अनेक प्रकार होते हैं। जैसे कठिन शक्ति और सौम्य शक्ति, सकल शक्ति और सूक्ष्म शक्ति। स्त्री सौम्य शक्ति और सूक्ष्म शक्ति का भण्डार है और इसकी अभिव्यक्ति आक्रमक शक्ति की अभिव्यक्ति से भिन्न होती है। यदि एक स्त्रि किसी पुरुष से स्पर्धा करती है और अपने मुद्दों क

कार्यकार्ता का गुण और विकास

Rs.6.00
कार्यकार्ता का गुण और विकास
VRM Code: 
3008
Publication Year: 
2014
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
32
Volumes: 
1
कार्यकार्ता का गुण और विकास

जब हमारा गुण विकास करना है, तो ये तीन मूलभूत बातें ध्यान में रखनी पड़ेगी कि मनुष्य में शरीर मन बुध्दि और समय है। दुनिया में मानव उसकी विशेषता है। और अगर मन निश्चय कर ले, तो सत्य क्या है, वह समझ सकता है। उसको हमारे यहाँ कहते है, नर का नारायण बन सकना तो हमारे यहाँ एक शब्द है आत्मकल्याण। तो नर देह किसलिए है ? आत्मकल्याण करने के लिए। आत्म का कल्याण यानि क्या? सब में आत्मा है कि नहीं है ? तो मुझे अच्छा लगता और जिस के कारण मुझे अच्छा लगता है। वैसे उसके कारण अन्य को भी आनंद होता होगा। अत: जिसमें मुझे आनंद है, वही करना। और मुझे जिसमें दुख है, वह नहीं करना।

केन्द्र दर्शन - एकनाथजी के पत्रों से

Rs.110.00
केन्द्र दर्शन - एकनाथजी के पत्रों से
Translator: 
Suresh Prabhavalakar
VRM Code: 
1628
Publication Year: 
2005
Edition: 
2
Format: 
Soft Cover
Pages: 
368
Volumes: 
1

मौखिक शब्द के बाद सम्प्रेषण का सर्वाधिक प्रभावकारी माध्यम पत्र है। कई लोग सूचनाओं के प्रसार के लिए पत्र लिखते हैं। महापुरुष, राष्ट्र निर्माता, समाजिक निर्माता, बड़े आन्दोलनों के नायक आदि सभी महान पत्र लेखक हैं।ऐसे पत्र विश्व - साहित्य की एक उल्लेखनीय शाखा हैं। पत्र लेखक के व्यक्तित्व और काल से परे, उनकी प्रासंगिकता की वजह से, ऐसे पत्रों का महत्व है। स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गांधीजी, श्री गुरुजी, हमारे देश के उन महापुरुषों में हैं। जिनके पत्रों को उच्च कोटि के साहित्य का दर्जा प्राप्त हैं। माननीय एकनाथजी रानडे द्वारा लिखे गए पत्रों की तादाद, विभिन्नता और उनके प्रभाव को ध्यान में लेते वे भी इस

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