Hindi

Here are the lists of Publications in Hindi from Vivekananda Kendra Prakashan and all Projects

क्रीड़ा योग

Rs.50.00
क्रीड़ा योग
Translator: 
Sandhya Kumari
Publication Year: 
2016
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
126

श्री (स्वर्गीय) दत्ताराम पोळ जो कि विवेकानन्द केन्द्र के वानप्रस्थी कार्यकर्ता रह चुके हैं, अन्य संगठनात्मक गुणों के साथ विभिन्न खेल सीखने के माध्यम से शिविरार्थियों में उनकीछाप विशेष रूप से थी ।
वे वृद्धावस्था में भी युवा का जोश रखते थे और युवाओं में विशेषरूप से प्रचलित थे । यह पुस्तक 'क्रीड़ा योग' उन्हीं की देन है - जिन खेलों से न केवल शरीर ही चुस्त होगा बल्कि मन भी आनन्दित होगा ।
1 : सामूहिक क्रीड़ा
2 : मण्डल क्रीड़ा
3 : एक पंक्ति क्रीड़ा
4 : दो पंक्ति क्रीड़ा
5 : गृहस्थित क्रीड़ा







दिनचर्या

Rs.25.00
दिनचर्या
Translator: 
Sandhya Kumari
Publication Year: 
2015
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
64
Volumes: 
1
Language: 
Hindi
दिनचर्या

Let's Sing

Rs.20.00
Let's Sing
Let's Sing
Publication Year: 
2004
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
79
Language: 
Tamil
VRM Book Code: 
1682
Let's Sing
Let's Sing

Preak Parichay(प्रेयक परिचय)

Rs.35.00
Preak Parichay(प्रेयक परिचय)
Translator: 
Nivedita Raghunath Bhide
Publication Year: 
2007
Edition: 
3
Format: 
Soft Cover
Pages: 
56
Language: 
Hindi
VRM Book Code: 
1709
Preak Parichay(प्रेयक परिचय)

यह काम तुम्हें शोभा नहीं देता - बषपन से ही यह वाक्य हमें अनुशासित करता आया है। माँ ने हमें इसी तरह अपने लिए योग्य कर्म करने की शिक्षा दी और अयोग्य कर्म करने से परावृत किया। भगवान् श्री कृष्ण ने भी रण से पलायन करने के इच्छुक अर्जुन को इन्हीं शब्दों से लताड़ा था। हमारा कर्म ही हमारा परिचय बनता है। कर्म में कुशलता को प्राप्त करने के लिए ही हम सदैव प्रयत्न करते रहते हैं।

Anokha Fern Azolla(अनोखा फर्न अजोला)

Rs.70.00
Anokha Fern Azolla(अनोखा फर्न अजोला)
Anokha Fern Azolla(अनोखा फर्न अजोला)
Publication Year: 
2009
Format: 
Soft Cover
Pages: 
95
VRM Book Code: 
1773
Anokha Fern Azolla(अनोखा फर्न अजोला)
Anokha Fern Azolla(अनोखा फर्न अजोला)

विवेकानन्द के एकनाथ

Rs.35.00
विवेकानन्द के एकनाथ
Publication Year: 
2015
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
104
Volumes: 
1
Language: 
Hindi
विवेकानन्द के एकनाथ

स्वामीजी का एक स्वप्न था कि पवित्रता का तेज, ईश्वर के प्रति श्रध्धा तथा मृगेन्द्र के सामर्थ्य से युक्त, दीन-दलितों के प्रति अपार करुणा लिए हुए सहस्त्र युवक-युवती हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक सर्वत्र संचार करते हुए मुक्ति, सेवा अौर सामाजिक उत्थान तथा सभी प्रकार के समानता का आह्वान करेंगे तभी यह देश पौरुष से युक्त होकर जगमगा उठेगा।

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