Swami Vivekananda

सिंहनाद

Rs.25.00
सिंहनाद
Publication Year: 
2012
Edition: 
2
Format: 
Soft Cover
Pages: 
50
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
1877

अविस्मरणीय विवेकानन्द

Rs.65.00
अविस्मरणीय विवेकानन्द
Translator: 
Kalyani Phadke
Publication Year: 
2012
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
128
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
1906

सावरकर : विवेकानन्द के परिपेक्ष्य में

Rs.40.00
सावरकर : विवेकानन्द के परिपेक्ष्य में
Translator: 
Devi Datt Ramchandra Chitale
Publication Year: 
2012
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
106
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
1915
सावरकर : विवेकानन्द के परिपेक्ष्य में

वीर सावरकर में देशभक्त विद्वान् , एक समाजसुधारक, बुद्धिवादी, मानवता-वादी, दार्शनिक, इतिहासकार, अलौकिक दूरदृष्टिवाले राजनेता और असाधरण वक्ता के गुणों का दुर्लभ समन्वय था। सिद्धान्तवादी होने के साथ साथ क्रियाशील भी थे और मराठी साहित्य में तो बेजोड़ थे। वे महाकाव्य की ऊँचाई को छूने वाले कवि, प्रतिभाशाली निबन्धकार और नाटककार थे।

उन्होंने अपने लेखन मेम विज्ञानप्रणीत संस्कारों का अनुमोदन एवं अनुकरण किया। उनके कार्यक्रम तर्कसंगत बुद्धिवाद एवं कारण मीमांसा पर आधारित होते थे। परन्तु उनका ध्येय के प्रति सम्पूर्ण समर्पण एवं आत्मबलिदान की ओर आकर्षण, गहन अध्यात्म से प्रेरित थे।

स्वामी विवेकानन्द का शंखनाद

Rs.5.00
स्वामी विवेकानन्द का शंखनाद
Publication Year: 
1992
Edition: 
3
Format: 
Soft Cover
Pages: 
32
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
1540

स्वामी विवेकानन्द के ऊर्जाप्रदायी वाक्यों ने सदा ही भारत एवं विश्वभर के युवामानस को प्रेरित किया है। इन वचनों की चिनगारी ने स्वतन्त्रता - पूर्व क्रान्तिज्वाला को प्रज्वलित किया था। अनेक सेवाकार्यों को उत्प्रेरणा एवं बल प्रदान करनेवाले ये सुविचार अन्तस की गहराई से उद् भूत मन्त्रों के समान पवित्र हैं । निराश मन की कर्म-प्रेरणा बननेवाले ये शब्द-स्फुल्लिंग नित्य मननीय, सदा स्मरणीय एवं पुन:-पुन: पठनीय हैं।

मंत्र सफलता का

Rs.25.00
मंत्र सफलता का
मंत्र सफलता का
Translator: 
Sangita Soman
Publication Year: 
2012
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
64
Volumes: 
1
Language: 
Hindi
VRM Book Code: 
1904
मंत्र सफलता का
मंत्र सफलता का

प्रकृति त्रिगुणात्मक होने के कारण तथा प्रत्येक कर्म में अच्छे बुरे का मिश्रण होने के कारण हमारा अपेक्षित आदर्श जगत कभी भी अस्तित्व में नहीं आयेगा। जीवन अर्थात् निरन्तर संघर्ष ! फिर भी हमें कर्म करना है, वह भी आत्मशुद्धि हेतु।

एक बार गुरुजी गोऴवलकर से एक व्यक्ति ने उनके जीवन का प्रधान सूत्र पूछा तब गुरुजी बोले -' मैं नहीं तू '- इस प्रकार सर्वोच्च आत्मयाग या सम्पूर्ण आत्मविसर्जन ही कर्मयोग का मूलतत्त्व है।

हमारा प्रस्तुत कार्य

Rs.15.00
हमारा प्रस्तुत कार्य
Edition: 
3
Format: 
Soft Cover
Pages: 
28
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
1619
हमारा प्रस्तुत कार्य

Lecture Delivered by Swami Vivekananda at Chennai.

मेरी क्रांतिकारी योजना

Rs.10.00
मेरी क्रांतिकारी योजना
Edition: 
3
Format: 
Soft Cover
Pages: 
28
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
1618
मेरी क्रांतिकारी योजना

Lecture Delivered by Swami Vivekananda at Chennai.

भारत के महापुरुष

Rs.10.00
भारत के महापुरुष
Edition: 
3
Format: 
Soft Cover
Pages: 
24
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
1620
भारत के महापुरुष

Lecture Delivered by Swami Vivekananda at Chennai.

भारत का भविष्य

Rs.10.00
भारत का भविष्य
Edition: 
3
Format: 
Soft Cover
Pages: 
28
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
1542

Lecture Delivered by Swami Vivekananda at Chennai.

अद्धितीय भारत

Rs.180.00
अद्धितीय भारत
Publication Year: 
2014
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
588
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
3080
अद्धितीय भारत

भारत से इस प्रकार प्रेम करो जिस प्रकार स्वामी विवेकानन्द करते थे|

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