Swami Vivekananda Sardh Shati Samaroh

Rousing Call To Hindu Nation

Rs.50.00
Rousing Call To Hindu Nation
Rousing Call To Hindu Nation
ISBN: 
81-89248-10-3
Publication Year: 
1963
Edition: 
10
Format: 
Soft Cover
Pages: 
188
Volumes: 
1
Language: 
English
VRM Book Code: 
1518
Rousing Call To Hindu Nation
Rousing Call To Hindu Nation

State of affairs of our nation lends a new significance to the message of Swami Vivekananda. For his was the message of strength-the strength of the body, the mind and the will. And this strength in all its aspects is the greatest need of the hour. Swami Vivekananda wanted the nation to have “muscles of iron and nerves of steel inside which dwells a mind of the same material as that of which the thunderbolt is made”.

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સ્વામી વિવેકાનંદનું હિન્દુ રાષ્ટ્રને ઉદ્બોધન

Rs.35.00
સ્વામી વિવેકાનંદનું હિન્દુ રાષ્ટ્રને ઉદ્બોધન
સ્વામી વિવેકાનંદનું હિન્દુ રાષ્ટ્રને ઉદ્બોધન
Translator: 
Sri Ramaniklal Jaychandabhai dalal
Publication Year: 
2012
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
152
Volumes: 
1
સ્વામી વિવેકાનંદનું હિન્દુ રાષ્ટ્રને ઉદ્બોધન
સ્વામી વિવેકાનંદનું હિન્દુ રાષ્ટ્રને ઉદ્બોધન

युगनायक

Rs.20.00
युगनायक
युगनायक
Publication Year: 
2012
Edition: 
2
Format: 
Soft Cover
Pages: 
128
Volumes: 
1
Language: 
Marathi
युगनायक
युगनायक

भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !

Rs.15.00
भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !
भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !
Publication Year: 
2012
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Volumes: 
1
Language: 
Marathi
VRM Book Code: 
3092
भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !
भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !

भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !

Rs.15.00
भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !
भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !
Publication Year: 
2012
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
64
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
3004
भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !
भारत जागो ! विश्र्व जगाओ !

सन् १८९३ में शिकगो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानन्द का उद् बोधन सुनकर और उसके बाद अमरिका व यूरोप की उनकी यात्रा के दौरान उनके भाषणों से पश्चिमी विश्व क्यों उत्तेजना से भर उठा था ? कोलम्बो से अल्मोड़ा तक भेजे गए उनके पत्रों और भाषणों के माध्यम से उन्होंने हमें क्या संदेश दिया था ?

१५० वीं जयन्ती का यह समारोह वैश्विक परिदृश्य तथा इसमें भार की भूमिका पर गहन मंथन का अवसर है। यह स्वामी विवेकानन्द के जीवन और संदेश तथा आवश्वक रुप से, भारत के प्राचीन ऋषियों द्वारा बताये गए -" कृण्वन्तो विश्वं आर्यम् " - अर्थात् समस्त विश्व को सुसंस्कृत बनाएं।

स्वामी विवेकानंद का जीवन और संदेश

Rs.15.00
स्वामी विवेकानंद का जीवन और संदेश
स्वामी विवेकानंद का जीवन और संदेश
Publication Year: 
2012
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
48
Volumes: 
1
VRM Book Code: 
1901
स्वामी विवेकानंद का जीवन और संदेश
स्वामी विवेकानंद का जीवन और संदेश

तुलनात्मक रुप से स्वामी विवेकानन्द का इस धराधाम पर बसेरा थोड़े ही दिनों का रहा। जीवन के संक्षिप्त विस्तार में, उनकी उपलब्धियाँ अत्यधिक थीं। उनका जीवन और संदेश लाखों युव व प्रौढ़ में समान रुप से प्रेरणा का स्रोत रहा।

बीज हर्गिज बरगद का पेड़ नहीं होता, यद्यपि सम्भावी रुप से बिज में समाविष्ट होता है। इसी प्रकार आशा की जाती है कि स्वामी विवेकानन्द के इस संक्षिप्त जीवन चरित्र से पाठक को भारत के महान् तूफानी संन्यासी के और अधिक विस्तृत जीवन का अध्ययन करने की प्रेरणा प्राप्त होगी।

Wake Up Bharat ! Enlighten the World !

Rs.15.00
Wake Up Bharat ! Enlighten the World !
Wake Up Bharat ! Enlighten the World !
Publication Year: 
2012
Edition: 
1
Format: 
Soft Cover
Pages: 
66
Volumes: 
1
Language: 
English
VRM Book Code: 
1491
Wake Up Bharat ! Enlighten the World !
Wake Up Bharat ! Enlighten the World !

Why was the West electified when Swami Vivekananda addressed the parliament of Religions in Chicago in 1893 and in the course of his subsequent tour of the US and Europe? What was his message to us - contained in his letters and speeches delivered from Colombo to Almora?

The 150 Birth Anniversary Celebrations of Swami Vivekananda will be a historic landmark for Bharat, nay for the entire world.

कथा विवेकानंदांच्या

Rs.20.00
कथा विवेकानंदांच्या
कथा विवेकानंदांच्या
Publication Year: 
1995
Edition: 
3
Format: 
Soft Cover
Pages: 
72
Volumes: 
1
Language: 
Marathi
VRM Book Code: 
1548
कथा विवेकानंदांच्या
कथा विवेकानंदांच्या
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